
दरभंगा, 06 दिसम्बर 2025।
बाल संरक्षण और किशोर न्याय व्यवस्था किसी भी सभ्य समाज की पहचान होती है। इसी उद्देश्य को सशक्त करते हुए समाहरणालय परिसर स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों हेतु एक दिवसीय उन्मुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह पहल न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता के मूल्यों को भी गहराई से स्थापित करती है।
कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य किशोर न्याय प्रणाली को अधिक परिणामकारी बनाना, बाल संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ करना और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना था। माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री गोपाल मिश्र ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य दंड नहीं, बल्कि सुधार है। विशेषकर वे बच्चे जो विधि विरुद्ध गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं, वे दंडनीय न होकर संरक्षण योग्य हैं। उन्हें सही दिशा, सुरक्षित वातावरण और सामाजिक पुनर्वास की आवश्यकता है।
यूनिसेफ के मास्टर ट्रेनर द्वारा POCSO Act, Juvenile Justice Act एवं अन्य विधिक प्रावधानों पर विस्तृत प्रशिक्षण यह दर्शाता है कि संवेदनशीलता और विधिक समझ का सम्मिश्रण ही बाल संरक्षण का वास्तविक आधार है। यह कार्यक्रम पुलिस पदाधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं और न्यायिक तंत्र के बीच आपसी समन्वय का मजबूत पुल बनकर उभरा।
आज यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि बच्चे हमारे समाज की नींव हैं। उनकी सुरक्षा केवल प्रशासन या न्यायपालिका की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक चेतना से जुड़ा दायित्व है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य की दिशा तय करते हैं और एक मजबूत, सुरक्षित तथा संवेदनशील समाज के निर्माण की आधारशिला रखते हैं।
यह आयोजन न केवल प्रशंसनीय है बल्कि एक मार्गदर्शक पहल है, जिसे नियमित और व्यापक स्तर पर लागू करने की आवश्यकता है, ताकि बाल अधिकारों की रक्षा सिर्फ कागज़ों में नहीं बल्कि धरातल पर साकार हो सके।




















