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संभल में जामा मस्जिद या हरिहर मंदिर? ASI की 150 साल पुरानी रिपोर्ट में पृथ्वीराज चौहान का जिक्र

संभल, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को लेकर एक नई बहस ने तूल पकड़ लिया है। हाल ही में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की एक पुरानी रिपोर्ट सामने आई है, जो 150 साल पुरानी है और उसमें पृथ्वीराज चौहान के समय का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में इन दोनों स्थलों के बारे में उल्लेख किया गया है, और इससे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ में नए सवाल उठने लगे हैं।

 

पुरानी ASI रिपोर्ट का महत्व:

 

 

 

 

 

 

ASI की यह रिपोर्ट 19वीं सदी के आखिरी दशक की है और उसमें संभल जिले के कुछ प्रमुख धार्मिक स्थल और उनके ऐतिहासिक संदर्भों पर विस्तार से चर्चा की गई है। इस रिपोर्ट में हरिहर मंदिर और जामा मस्जिद का जिक्र है, और इसमें पृथ्वीराज चौहान से जुड़ी घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह इलाके ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं और यहां पर समय-समय पर हिंदू और मुस्लिम संस्कृति के मिश्रण के प्रमाण मिलते हैं।

 

 

 

 

 

 

पृथ्वीराज चौहान का जिक्र:

 

 

 

 

 

ASI की रिपोर्ट में पृथ्वीराज चौहान का नाम इस संदर्भ में लिया गया है कि सम्भल का क्षेत्र पृथ्वीराज के साम्राज्य का हिस्सा था। रिपोर्ट के मुताबिक, पृथ्वीराज चौहान ने इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी और संभवतः यहां पर मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों का निर्माण भी कराया था। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हरिहर मंदिर और जामा मस्जिद दोनों में से कौन सा स्थल पहले अस्तित्व में था, लेकिन यह सुझाव दिया गया है कि मंदिर का निर्माण पुराने समय में हुआ था और बाद में उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया।

 

 

 

 

 

 

जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व:

 

 

 

 

 

 

  • जामा मस्जिद: यह मस्जिद सम्भल शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और मुगल काल में बनाई गई मानी जाती है। मस्जिद की वास्तुकला में उस समय की मुगल शैली का प्रभाव देखने को मिलता है। इसे मुस्लिम समुदाय द्वारा पूजा और नमाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

 

 

 

 

 

  • हरिहर मंदिर: यह एक प्राचीन हिंदू मंदिर है, जो सम्भल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। मंदिर का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसका संबंध हिंदू देवी-देवताओं के पूजा स्थल से है, और यह स्थान उस समय के धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

 

 

 

 

मंदिर और मस्जिद के बीच विवाद:

 

 

 

 

 

 

 

सम्भल में जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर के बीच विवाद लंबे समय से जारी है, खासकर ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर। हिंदू और मुस्लिम समुदाय दोनों ही इन स्थलों को लेकर अपनी-अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक दावे करते आए हैं। हाल ही में, ASI की रिपोर्ट ने इस विवाद को और भी तूल दे दिया है, क्योंकि इसमें पृथ्वीराज चौहान के समय की घटना का उल्लेख किया गया है, जो एक ऐतिहासिक लिंक के रूप में सामने आया है।

 

 

 

 

 

 

 

नया विवाद और जांच की आवश्यकता:

 

 

 

 

 

 

 

ASI की रिपोर्ट में पृथ्वीराज चौहान के संदर्भ के साथ ही मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या इस रिपोर्ट से यह साबित होता है कि हरिहर मंदिर का अस्तित्व पहले था और बाद में मस्जिद का निर्माण हुआ? या फिर यह दो अलग-अलग ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का हिस्सा हैं? यह मुद्दा धार्मिक विवादों के साथ-साथ इतिहासिक प्रमाणों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।

 

 

 

 

 

 

अभी तक, ASI और अन्य ऐतिहासिक संगठनों द्वारा इस मामले में कोई स्पष्ट रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन संभल में मंदिर और मस्जिद के बीच चल रहा यह विवाद नए ऐतिहासिक तथ्यों के सामने आने के बाद एक नई दिशा में जा सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

निष्कर्ष:

 

 

 

 

 

 

संभल के जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर के बीच ऐतिहासिक विवाद अब नए मोड़ पर आ गया है, जब ASI की 150 साल पुरानी रिपोर्ट में पृथ्वीराज चौहान का जिक्र सामने आया है। यह रिपोर्ट इन स्थलों के ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर नई बहस का कारण बन सकती है। अब यह देखना होगा कि ASI और अन्य ऐतिहासिक संस्थान इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या यह विवाद कानूनी या ऐतिहासिक दृष्टिकोण से हल हो पाता है।

 

 

 

 

 

 

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