अयोध्या की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिका को तथ्यहीन और बलहीन बताते हुए इसे निरस्त कर दिया
अयोध्या की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिका को तथ्यहीन और बलहीन बताते हुए इसे निरस्त कर दिया।
मामले की सुनवाई करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट सिविल जज सीडी अंशुमाली पांडेय ने मोदहा निवासी अली बाबा की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन ऐसे मामलों की सुनवाई का क्षेत्राधिकार इस न्यायालय के पास नहीं है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि 13 जून 2025 को थाना कोतवाली नगर क्षेत्र में स्थित अली बाबा का मकान बिना किसी पूर्व सूचना के बुलडोजर से गिरा दिया गया। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान घर के अंदर रखा गृहस्थी का सामान भी नष्ट हो गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि तहसील सदर के अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी में उनका आशियाना ढहा दिया गया।
प्रार्थना पत्र में यह भी दावा किया गया था कि जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की निगरानी में मकान के दरवाजे, खिड़कियां और सरिया भी गायब करा दिए गए, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने मुख्यमंत्री समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी।
हालांकि अदालत ने याचिका में पर्याप्त साक्ष्य न होने और अधिकार क्षेत्र के अभाव का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अलग सक्षम मंच निर्धारित है।