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बस्ती में ‘मौत के कुएं’ बने खुले नाले: मासूमों की जिंदगी दांव पर, चेयरमैन के आश्वासन निकले खोखले!

बस्ती नगर पालिका की घोर लापरवाही: ब्लॉक रोड से मालवीय रोड तक 'खूनी नालों' का जाल, हादसे का इंतजार?

अजीत मिश्रा (खोजी)

जनता की जान आफत में, सो रहा प्रशासन: कब जागेगी नगर पालिका?

विशेष ब्यूरो, बस्ती।

  • कागजी दावों की खुली पोल: कूड़े से पटे नाले और गायब ढक्कन, मानसून से पहले टापू बनने की कगार पर बस्ती!
  • टैक्स वसूली में सुपरफास्ट, जनसुरक्षा में कछुआ चाल: आखिर कब सुधरेगी बस्ती नगर पालिका?
  • बस्ती की सड़कों पर चलना यानी मौत को दावत! बेजुबानों की चीख और जनता के आक्रोश से भी नहीं टूटी ‘कुंभकर्णी नींद’
  • चेयरमैन साहिबा! जनता को कब तक मिलेगा आश्वासनों का ‘लॉलीपॉप’? बदहाल सड़कों पर भड़का लोगों का गुस्सा

बस्ती शहर की सड़कों पर चलना इन दिनों मौत को दावत देने जैसा हो गया है। जगह-जगह टूटे और गायब नालों के ढक्कन नगर पालिका प्रशासन के निकम्मेपन की जीती-जागती तस्वीर पेश कर रहे हैं। कहने को तो यह एक जिला मुख्यालय है, लेकिन यहाँ की बदहाल व्यवस्था को देखकर लगता है कि जनता को उसके हाल पर ही मरने के लिए छोड़ दिया गया है।

‘यूनीक साइंस एकेडमी’ के पास खुला मौत का कुआँ

तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। नगर पालिका क्षेत्र के ब्लॉक रोड पर स्थित ‘यूनीक साइंस एकेडमी’ के ठीक पास नाले का ढक्कन पूरी तरह टूट कर गिर चुका है। यहाँ हर समय एक खौफनाक गड्ढा राहगीरों का स्वागत करने के लिए तैयार खड़ा है।

मासूम बच्चों की जिंदगी दांव पर: सबसे शर्मनाक बात यह है कि इसी रास्ते से होकर रोज़ सैकड़ों स्कूली बच्चे गुजरते हैं। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम की जान जाने के बाद ही यहाँ फाइलें आगे बढ़ेंगी?

बेजुबान पशुओं पर आफत: स्थानीय लोगों के मुताबिक, आए दिन बेसहारा पशु इन खुले नालों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। लेकिन जिम्मेदारों की खाल इतनी मोटी हो चुकी है कि उन्हें इन बेजुबान जीवों की चीखें भी सुनाई नहीं देतीं।

मालवीय रोड का भी यही हाल: कागजी दावों की खुली पोल

समस्या सिर्फ एक जगह की नहीं है। मालवीय रोड समेत शहर के कई प्रमुख मार्ग खुले नालों की वजह से ‘डेंजर ज़ोन’ में तब्दील हो चुके हैं।

कचरे का अंबार और जाम होती नालियां: ढक्कन न होने के कारण इन नालों में लगातार कूड़ा-कचरा गिर रहा है, जिससे पूरी ड्रेनेज व्यवस्था ठप हो चुकी है।

जलभराव की आसन्न विभीषिका: गर्मी के इस मौसम में जब यह हाल है, तो मानसून की बारिश में क्या होगा? जल निकासी न होने से पूरा शहर टापू बन जाएगा और संक्रामक बीमारियों का खतरा अलग से फैलेगा।

आश्वासन के ‘लॉलीपॉप’ से कब तक बहलेगी जनता?

जब इस गंभीर लापरवाही पर नगर पालिका परिषद की चेयरमैन नेहा वर्मा से जवाब मांगा गया, तो हमेशा की तरह एक रटा-रटाया बयान सामने आ गया—”कुछ जगहों पर नाले ढक्कन विहीन हैं, जल्द ही नए ढक्कन लगवाने की व्यवस्था की जाएगी।” हम पूछना चाहते हैं: > यह “जल्द ही” कब आएगा? क्या बजट की कमी का रोना रोकर जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने का लाइसेंस मिल जाता है? टैक्स वसूलने में तो नगर पालिका कभी ‘जल्द ही’ का इंतजार नहीं करती, फिर जनता को सुरक्षा देने में यह कछुआ चाल क्यों?

अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है!

स्थानीय नागरिकों का आक्रोश अब चरम पर है। लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर मालवीय रोड और ब्लॉक रोड के इन खूनी नालों को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। नगर पालिका प्रशासन को अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना ही होगा। जनता को खोखले आश्वासन नहीं, अपनी सुरक्षा और साफ-सुथरी सड़कें चाहिए। यदि जल्द ही इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर नगर पालिका प्रशासन और उसके अधिकारियों की होगी।

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