अस्पताल है या अखाड़ा? बेडशीट बदलने को कहने पर मरीज के परिजनों के साथ बदसलूकी

अजीत मिश्रा (खोजी)
कैसा है ‘स्वास्थ्य’ का यह ‘केंद्र’? जहाँ मरीज को नहीं मिलता सम्मान, केवल दुर्व्यवहार!
- अस्पताल के अंदर हंगामा, बाहर से महंगी दवा लिखने का आरोप: कब सुधरेगी सीएचसी कप्तानगंज की व्यवस्था?
- मरीज की जान से खिलवाड़: सीएचसी कप्तानगंज में सफाई पर बवाल, कर्मियों पर अभद्रता के गंभीर आरोप
कप्तानगंज: सरकारी अस्पताल का नाम सुनते ही मन में उम्मीद आती है कि शायद यहाँ गरीब को सस्ता और अच्छा इलाज मिलेगा। लेकिन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कप्तानगंज का सच कुछ और ही बयां कर रहा है। यहाँ इलाज पाने की चाह में पहुंचने वाले मरीज और उनके परिजन जब अपनी वाजिब मांग रखते हैं, तो उन्हें ‘इलाज’ की जगह अस्पताल कर्मियों के ‘रौद्र रूप’ और बदसलूकी का सामना करना पड़ता है।
बेडशीट बदलने की मांग बनी ‘गुनाह’
हालिया घटना ने इस स्वास्थ्य केंद्र की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मरीज के परिजनों द्वारा केवल गंदी बेडशीट बदलने की सामान्य मांग करना अस्पताल कर्मियों को इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने न केवल उनसे अभद्र व्यवहार किया, बल्कि मामले को तूल देकर अस्पताल परिसर में घंटों तक हंगामा खड़ा कर दिया। क्या एक स्वच्छ वातावरण में इलाज पाना मरीज का अधिकार नहीं है? क्या सफाई की मांग करना अब ‘गुनाह’ माना जाएगा?
‘कमीशन’ का खेल, बाहर से दवा और जांच की मजबूरी
सिर्फ बेडशीट ही नहीं, अस्पताल के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के आरोप भी गंभीर हैं। पीड़ितों का आरोप है कि अस्पताल में उपलब्ध होने वाली दवाइयों के बजाय डॉक्टरों द्वारा बाहर से मोटी कमीशन वाली दवाइयां लिखी जा रही हैं। साथ ही, मरीजों को बाहर से जांच करवाने के लिए मजबूर करना यहाँ की आम कार्यप्रणाली बन गई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या ये अस्पताल गरीब मरीजों के लिए हैं या अपनी जेबें भरने वालों के लिए?
किसकी है जिम्मेदारी?
हमेशा विवादों और चर्चाओं में रहने वाला सीएचसी कप्तानगंज अब अपनी बदइंतजामी का केंद्र बन चुका है। अस्पताल में तड़पते मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जबकि वहां के कर्मी अपने रौब झाड़ने में व्यस्त हैं।
बड़ा सवाल: आखिर कब तक ये अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का बोलबाला रहेगा? क्या संबंधित अधिकारी इस मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर मरीजों की जान के साथ यह खिलवाड़ यूँ ही ‘राम भरोसे’ चलता रहेगा?
प्रशासन को इस मामले में त्वरित संज्ञान लेकर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार लाने और दोषी कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है, ताकि लोगों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।
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