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कोयला चोरी पर भाषणबाजी पड़ी भारी, बीसीसीएल सीएमडी ने मजदूर नेता को भेजा 10 करोड़ का मानहानि नोटिस

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*धनबाद।* कोयला चोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर बीसीसीएल और मजदूर संगठनों के बीच टकराव बढ़ गया है। बीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मनोज कुमार अग्रवाल ने कोयलांचल बचाओ संघर्ष मोर्चा से जुड़े मजदूर नेता हंजला बिन हक को 10 करोड़ रुपये की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है।

इसकी पुष्टि कोयला भवन मुख्यालय ने भी की है।

रांची हाईकोर्ट के अधिवक्ता अनूप कुमार मेहता के माध्यम से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि 2 जून 2026 को रणधीर वर्मा चौक पर हुए धरना-प्रदर्शन और उसके बाद मीडिया में दिए गए बयानों में हंजला ने सीएमडी पर कोयला चोरी, अवैध सिंडिकेट चलाने, भ्रष्टाचार और अकूत संपत्ति जैसे गंभीर आरोप लगाए। इससे उनकी व्यक्तिगत, आधिकारिक और पेशेवर प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि ये बयान विभिन्न मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुए, जिससे मानहानिकारक आरोपों का व्यापक प्रचार हुआ। भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 के तहत इसे मानहानि बताते हुए 7 दिनों के भीतर बिना शर्त लिखित माफी, सार्वजनिक बयान वापसी, वीडियो-पोस्ट हटाने और 10 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की गई है। जवाब नहीं देने पर आपराधिक और दीवानी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

*हंजला का जवाब:* नोटिस मिलने पर मजदूर नेता हंजला बिन हक ने कहा कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने की सजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करना नहीं, बल्कि बीसीसीएल में हो रही कथित कोयला चोरी और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना था।

हंजला ने कहा, ‘निरसा, झरिया, धनबाद और बाघमारा में कोयला चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसकी खबरें अखबारों में भी छपती हैं। सीएमडी होने के नाते कोयला चोरी रोकने की जिम्मेदारी उन्हीं की है। सीआईएसएफ जैसी सुरक्षा के बावजूद चोरी नहीं रुक रही तो सवाल उठना लाजमी है।’

उन्होंने बीसीएल के केंद्रीय अस्पताल को बेहतर बनाने के बजाय ‘किसी असर्फी को बेहतर बनाने’ का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक धन के सदुपयोग की मांग भी दोहराई। हंजला ने कहा कि कोयला चोरी इतना गंभीर मुद्दा है कि केंद्रीय गृह मंत्री ने भी इस पर उच्चस्तरीय बैठक कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

हंजला ने कहा कि नोटिस का जवाब पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी तरीके से दिया जाएगा। ‘लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज उठाना हमारा अधिकार है। जनहित का मुद्दा उठाने के लिए जेल भी जाना पड़े तो तैयार हैं, लेकिन आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।’

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