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जिला जेल में अवैध कॉलिंग का पर्दाफाश, जांच रिपोर्ट जल्द शासन को भेजी जाएगी

वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्ट

जिला जेल में प्राइवेट नंबर से कॉलिंग के मामले की पुलिस-प्रशासन की जांच पूरी हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार, जांच में न सिर्फ शिकायत की पुष्टि हुई है बल्कि जेल में अवैध पीसीओ जैसी सुविधा और उसके रेट तक की जानकारी सामने आई है। पूरी रिपोर्ट एक-दो दिन में शासन को भेज दी जाएगी। पुलिस-प्रशासन की जांच में यह साबित हो चुका है कि जेल के अंदर से न सिर्फ प्राइवेट नंबर पर कॉल की जा रही थी, बल्कि बाकायदा पीसीओ नुमा सुविधा चल रही थी। जांच रिपोर्ट एक-दो दिन में शासन को भेजी जाएगी।

🔎 जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

शिकायत सही पाई गई : बिहार में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला आरोपी विनोद गुप्ता जेल से ही फोन कर धमकी देता था।

अवैध पीसीओ का खुलासा : तय रेट पर कॉलिंग सुविधा, प्रति मिनट चार्ज तक फिक्स।

सिम सप्लाई चेन : बंदी पम्मी के जरिए आरोपी तक सिम कार्ड पहुंचाए गए। पुलिस ने उस पर निरोधात्मक कार्रवाई की है।

मुलाकाती बने जरिया : नियम तोड़कर गेट से ही सामान अंदर भेजा गया, शक है इसी रास्ते सिम और डिवाइस पहुंचे।

खुशामद का खेल : कई बंदी जेल नेटवर्क चलाने वालों की सेवा में जुटे मिले।

⚠️ जेल प्रशासन की लापरवाही उजागर

जांच में यह सवाल भी खड़ा हुआ है कि—

मुलाकातियों के सामान की सख्त जांच क्यों नहीं हुई?

गेट पर मौजूद कर्मचारियों ने नियमों को अनदेखा कैसे किया?

जेल में कॉलिंग जैसी सुविधा चल रही थी, फिर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं पड़ी?

इन बिंदुओं ने साफ कर दिया है कि जेल प्रशासन की ओर से बड़ी लापरवाही हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, बिहार में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले आरोपी विनोद गुप्ता की ओर से फोन पर बातचीत और धमकी देने की शिकायत भी सही पाई गई है। इसी आधार पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी तक दूसरा बंदी पम्मी सिम कार्ड पहुंचाता था। पम्मी के खिलाफ पुलिस पहले ही निरोधात्मक कार्रवाई कर चुकी है। पूछताछ में कई अहम राज खुले हैं। मुलाकातियों द्वारा जेल के अंदर पहुंचाए जाने वाले सामान को लेकर भी नए खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि नियमों के विपरीत सीधे गेट से सामान अंदर भेजा गया।

🌐 गिरोह की बाहरी लिंक की पड़ताल

सूत्र बताते हैं कि इस रैकेट के तार जेल के बाहर तक फैले हो सकते हैं।

ठगी और धमकी से जुड़े संपर्क नंबर बाहर के नेटवर्क से लिंक हैं।

शक है कि बाहर बैठे लोग बंदी और मुलाकातियों के जरिए यह खेल संचालित करते थे।

पुलिस अब उन नंबरों और खातों की डिटेल खंगाल रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी और कॉलिंग में हुआ।

पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि किस डिवाइस से कॉलिंग की जाती थी और प्रति मिनट कितने रुपये तय थे। कौन बंदी किस तरह खुशामद करके इस नेटवर्क का हिस्सा बने हुए थे, इसकी परतें भी धीरे-धीरे खुल रही हैं।

हालांकि जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल रिपोर्ट को लेकर आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं। वहीं जेल प्रशासन ने भी मुख्यालय स्तर से जांच शुरू कर दी है। जेल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं।

डीआईजी जेल राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जेल प्रशासन अपने स्तर पर भी जांच करा रहा है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

📹 सीसीटीवी और बयान से खुल रहा राज़

जांच टीम ने जेल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं और जिम्मेदारों से बयान लिए हैं। किस डिवाइस से बातचीत हुई और किस तरह अवैध धंधा चलता था, इसका पूरा ब्यौरा जुटा लिया गया है।

🚔 कार्रवाई की तैयारी

डीआईजी जेल राजेश कुमार श्रीवास्तव ने साफ कहा है—
👉 “जेल प्रशासन भी अपनी अलग जांच करा रहा है। दोषी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे।”

Jitendra Maurya

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