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बस्ती का ‘दीमक’: 18 साल से एक ही कुर्सी पर जमा बाबू नवीन चौधरी, भ्रष्टाचार के दम पर प्रशासन को दी चुनौती!

योगी राज में नियम तार-तार: जिला पूर्ति कार्यालय का 'अमरबेल' बना बाबू, स्थानांतरण नीति को दिखाया ठेंगा!

अजीत मिश्रा (खोजी)

✍️विशेष रिपोर्ट: भ्रष्टाचार की ‘अमरबेल’ बना बाबू, क्या योगी का ‘हंटर’ यहाँ फेल है?✍️

  • कमीशनखोरी का ‘बादशाह’: कोटेदारों से 50 रुपये प्रति कुंतल की वसूली, क्या ऊपर तक जाता है हिस्सा?
  • सिस्टम का ‘कमाऊ पूत’: आधा दर्जन DSO आए और गए, पर नवीन चौधरी की बादशाहत बरकरार!
  • जीरो टॉलरेंस का खुला मजाक: 18 वर्षों से एक ही पटल पर कुंडली मार कर बैठा बाबू, छवि हो रही धूमिल!
  • भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी: आखिर क्यों बेबस है प्रशासन? एक बाबू के आगे क्यों झुके जिम्मेदार अधिकारी?

06 अप्रैल 2026, बस्ती (उत्तर प्रदेश)

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल

बस्ती। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करती है, लेकिन बस्ती जिले का जिला पूर्ति कार्यालय इस दावे को खुलेआम मुंह चिढ़ा रहा है। यहाँ तैनात एक बाबू, नवीन चौधरी, पिछले 18 वर्षों से एक ही पटल पर कुंडली मारकर बैठा है। विडंबना देखिए कि इस दौरान आधा दर्जन से अधिक जिला पूर्ति अधिकारी (DSF) आए और चले गए, लेकिन किसी ने इस ‘अजेय’ बाबू की कुर्सी को हिलाने की जहमत नहीं उठाई। आखिर क्या मजबूरी है कि प्रशासन एक अदने से बाबू के सामने नतमस्तक है?IMG 20260408 WA0359

🎯’कमाऊ पूत’ के मोह में अंधा विभाग?

सूत्रों की मानें तो नवीन चौधरी विभाग के लिए कोई साधारण कर्मचारी नहीं, बल्कि एक ‘कमाऊ पूत’ की हैसियत रखता है। चर्चा है कि पूरे जिले के कोटेदारों से 50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से जो अवैध वसूली होती है, उसका मुख्य सिपहसालार यही बाबू है। प्रतिमाह लाखों रुपये की अवैध कमाई का एक बड़ा हिस्सा ऊपर तक पहुँचता है, यही कारण है कि जिम्मेदार अधिकारी इस भ्रष्टाचार की जड़ को उखाड़ने के बजाय इसे खाद-पानी दे रहे हैं।

🎯सरकार की छवि पर कालिख पोतता तंत्र

एक तरफ मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े तेवर अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ नवीन चौधरी जैसे कर्मचारी 18 वर्षों से एक ही जगह जमे रहकर भाजपा सरकार की साफ-सुथरी छवि को धूमिल कर रहे हैं। नियम कहते हैं कि तीन साल से अधिक एक पटल पर कार्य नहीं किया जा सकता, लेकिन यहाँ नियम-कायदों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया है।

“क्या बस्ती जिला प्रशासन इतना लाचार हो चुका है कि एक बाबू का स्थानांतरण उसके लिए हिमालय फतह करने जैसी चुनौती बन गया है?”

🎯सिस्टम की सड़ांध: पीड़ितों की कौन सुनेगा?

अगर हर विभाग में ऐसे ही ‘मठाधीश’ बाबूओं का जमावड़ा लगा रहा, तो आम जनता और पीड़ितों को न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी ही पड़ेंगी। नवीन चौधरी की मनमानी और भ्रष्टाचार ने यह साबित कर दिया है कि जिला पूर्ति कार्यालय में व्यवस्था पारदर्शी नहीं, बल्कि ‘कमीशन आधारित’ हो चुकी है।

🎯प्रशासन से सवाल:

👉किसके संरक्षण में 18 साल से एक ही पटल पर टिका है नवीन चौधरी?

👉क्या जिले के उच्चाधिकारियों को कोटेदारों से हो रही वसूली में अपना हिस्सा मिल रहा है?

👉स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करने वाले इस बाबू पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

बस्ती जिले का यह मामला अब सरकार की साख का सवाल बन चुका है। यदि इस ‘कमाऊ पूत’ पर नकेल नहीं कसी गई, तो जनता का सिस्टम से भरोसा उठना तय है। अब देखना यह है कि क्या शासन के आला अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हैं या फिर भ्रष्टाचार की यह गंगा यूँ ही निर्बाध बहती रहेगी।

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