
“सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज: कर्मचारी या गुंडा? ब्लड बैंक में तीमारदार से बदसलूकी का वीडियो वायरल!”
"सफेद कोट के पीछे छिपा 'अहंकार': तड़पते मरीज के तीमारदार को दी गालियां, स्वास्थ्य विभाग फिर शर्मसार
अजीत मिश्रा (खोजी)
सफेद कोट के पीछे ‘गुंडई’ का चेहरा: सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज में तीमारदार से बदसलूकी, क्या यही है स्वास्थ्य सेवा?
”माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में दबंगई: मदद के बदले मिली बदतमीजी, क्या प्रशासन लेगा आलोक मिश्रा पर एक्शन?”
“खून के लिए गुहार… बदले में दुर्व्यवहार! सिद्धार्थनगर ब्लड बैंक में कर्मचारी की गुंडई का खुलासा।”
“गुंडई पर उतरे सरकारी मुलाजिम! तीमारदार के साथ अभद्रता ने खोली मेडिकल कॉलेज की संवेदनहीनता की पोल।”
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (सिद्धार्थनगर)
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के सरकार के तमाम दावों पर सिद्धार्थनगर का माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज कालिख पोत रहा है। यहाँ के ब्लड बैंक से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है, जहाँ एक तरफ मरीज जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था, तो दूसरी तरफ जिम्मेदार कुर्सी पर बैठा कर्मचारी अपनी मर्यादा भूलकर ‘गुंडई’ पर उतारू था।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, कोल्हुई थाना क्षेत्र के ग्राम कमारिया बुजुर्ग निवासी एक तीमारदार अपने मरीज के लिए खून की आस में ब्लड बैंक पहुँचा था। आरोप है कि वहाँ तैनात कर्मचारी आलोक कुमार मिश्रा ने मदद करने के बजाय तीमारदार पर अपना रौब झाड़ना शुरू कर दिया। जब पीड़ित ने गुहार लगाई, तो कर्मचारी अपनी गरिमा भूल गया और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए तीमारदार के साथ जमकर बदसलूकी की।
बड़ा सवाल: क्या सरकारी अस्पतालों में तैनात कर्मचारी आम जनता की सेवा के लिए हैं या अपनी दबंगई दिखाने के लिए?
सिस्टम की संवेदनहीनता चरम पर
मेडिकल कॉलेज में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में कर्मचारी का व्यवहार किसी लोक सेवक जैसा नहीं, बल्कि किसी बेलगाम गुंडे जैसा प्रतीत हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ऐसे बददिमाग कर्मचारियों को जनता के बीच सेवा के लिए क्यों रखा गया है?
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल:
- क्या जिले के आला अधिकारी इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेंगे?
- क्या पीड़ित तीमारदार को न्याय मिलेगा या मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
- ब्लड बैंक जैसी संवेदनशील जगह पर तैनात कर्मचारी का यह व्यवहार क्या मरीजों की जान जोखिम में डालने जैसा नहीं है?
निष्कर्ष
सिद्धार्थनगर का यह मेडिकल कॉलेज अब अपनी सुविधाओं से ज्यादा विवादों और कर्मचारियों के अड़ियल रवैये के लिए जाना जाने लगा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘वर्दी वाले अहंकार’ पर नकेल कसता है या फिर भ्रष्टाचार और बदसलूकी का यह खेल यूँ ही जारी रहेगा।
जनता पूछ रही है सवाल: यह सरकारी कर्मचारी है या सरकारी संरक्षण में पल रहा गुंडा?
















