
”भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ‘आरोग्य मंदिर’: अधीक्षक और बीसीपीएम की वसूली ने स्वास्थ्य सेवाओं पर जड़ा ताला!”
"बस्ती में स्वास्थ्य विभाग लाचार: सीएचओ अभिषेक के आगे बौने साबित हुए सीएमओ और डीसीपीएम, साल भर से बंद है अस्पताल!"
अजीत मिश्रा (खोजी)
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’: अधीक्षक और बीसीपीएम की ‘अवैध वसूली’ ने स्वास्थ्य सेवाओं पर जड़ा ताला!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- “वसूली का ‘दुबौलिया मॉडल’: चिलमा सैनिया में गायब सीएचओ को अफसरों की शह, जनता के हक पर डकैती!”
- “साहब! ये ‘आरोग्य मंदिर’ है या भ्रष्टाचार का अड्डा? दर्जनों शिकायतों के बाद भी क्यों नहीं टूटी जिम्मेदार अधिकारियों की नींद?”
- सीएचओ की दबंगई या अफसरों से सेटिंग? साल भर से नहीं खुला अस्पताल का ताला!”
बस्ती। सूबे की सरकार जहाँ एक ओर बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दम भर रही है, वहीं बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) दुबौलिया में भ्रष्टाचार का दीमक सरकारी दावों को खोखला कर रहा है। ताजा मामला दुबौलिया ब्लॉक के ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर चिलमा सैनिया’ का है, जो अधीक्षक और बीसीपीएम की कथित ‘अवैध वसूली’ और प्रशासनिक शह के कारण सफेद हाथी साबित हो रहा है।
वसूली का ‘सिंडिकेट’ और गायब डॉक्टर
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। चर्चा है कि सीएचसी दुबौलिया के अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार और बीसीपीएम सुजीत सिंह के संरक्षण में ‘अवैध वसूली’ का खेल फल-फूल रहा है। इसी वसूली की ‘जुगाड़बाजी’ का नतीजा है कि चिलमा सैनिया का आयुष्मान आरोग्य मंदिर महीनों से बंद पड़ा है। यहाँ तैनात सीएचओ (CHO) अभिषेक कुमार ड्यूटी से गायब रहने के लिए कुख्यात हैं, लेकिन साहब की ‘ऊँची पहुँच’ और ‘महीने की सेटिंग’ के आगे विभाग ने आँखें मूँद ली हैं।
साल भर से लटका है ताला, गहरी नींद में विभाग
मीडिया टीम द्वारा पिछले एक वर्ष से की जा रही लगातार पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया कि इस आरोग्य मंदिर का ताला कभी खुलता ही नहीं। दर्जनों बार खबरें प्रकाशित हुईं, सोशल मीडिया पर शोर मचा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही। आखिर क्या वजह है कि ड्यूटी से नदारद रहने वाले सीएचओ अभिषेक कुमार पर कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी कन्नी काट रहे हैं?
अधिकारियों ने टेके घुटने: क्या सिस्टम लाचार है?
सवाल यह उठता है कि क्या एक छोटा सा कर्मचारी इतना रसूखदार हो गया है कि जिले के CMO (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) और DCPM भी उसके आगे लाचार नजर आ रहे हैं? दर्जनों बार सूचना दिए जाने के बावजूद अभिषेक कुमार के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई न होना, सीधे तौर पर ऊपर से नीचे तक की ‘सांठगांठ’ की ओर इशारा करता है।
बड़ा सवाल: जब स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार आका ही लापरवाह कर्मचारियों के आगे घुटने टेक देंगे, तो जनता को न्याय और इलाज कैसे मिलेगा?
जनता बेहाल, जेबें गरम
सीएचसी दुबौलिया के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र की जनता इलाज के लिए दर-दर भटक रही है, जबकि विभागीय अधिकारी कागजी घोड़े दौड़ाने और अपनी जेबें गरम करने में व्यस्त हैं। अगर जल्द ही इस ‘भ्रष्ट तंत्र’ पर नकेल नहीं कसी गई, तो ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ केवल भ्रष्टाचार के स्मारक बनकर रह जाएंगे।
अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद भी जिला प्रशासन मौन रहता है या इन ‘सफेदपोश’ लुटेरों पर कोई गाज गिरती है।




















