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सावधान! ₹15 वाले मैंगो शेक में ‘आम’ नहीं, ‘ज़हर’ घुला है! 200 रुपये किलो आम, पर 15 में शेक? बस्ती की सड़कों पर परोसा जा रहा है ‘स्लो पॉइजन’।

खतरनाक स्वाद: मैंगो शेक या कैमिकल का ब्रेक? बस्ती की पड़ताल: 'सफेद झूठ' है ₹15 वाला पीला शेक। मौत का गिलास: ज़रा संभल कर पीजिए!

अजीत मिश्रा (खोजी)

🥭गला तर करने से पहले ये पढ़ लें: जिसे आप शेक समझ रहे हैं, वो कैमिकल का घोल है! सस्ता शेक, महंगी सेहत: स्वाद के चक्कर में कहीं कैंसर को तो नहीं दे रहे दावत?🥭

  • ​बस्ती में मिलावटखोरों का तांडव: क्या सो रहा है खाद्य सुरक्षा विभाग?
  • ​मैंगो शेक के नाम पर सेहत से खिलवाड़, आखिर कब जागेगा बस्ती प्रशासन?
  • ​बिना आम के बन रहा है ‘मैंगो शेक’, अवैध फैक्ट्रियों और ठेलों पर कार्रवाई कब?
  • ​बाज़ार का गणित फेल: आम ₹200 और शेक ₹15; जानिए मिलावट का पूरा काला खेल।
  • ​असली आम का गूदा या घातक सिंथेटिक पाउडर? अपनी आंखों से पट्टी हटाइए!
  • ​सस्ते के मोह ने फंसाया: बस्ती के चौराहों पर बिक रहा ‘नकली’ रसीला आम।

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

विशेष पड़ताल: ₹200 किलो का आम और ₹15 का शेक? बस्ती की सड़कों पर ‘ज़हर’ का व्यापार!

बस्ती। गर्मी का पारा चढ़ते ही प्यास बुझाने के लिए अगर आप सड़क किनारे लगे ‘मैंगो शेक’ के ठेलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! जिसे आप रसीले आमों का अमृत समझकर पी रहे हैं, वह वास्तव में कैमिकल, सिंथेटिक पाउडर और खतरनाक रंगों का एक ऐसा जानलेवा कॉकटेल है, जो आपकी सेहत को आईसीयू (ICU) तक पहुंचा सकता है।

गणित जो गले नहीं उतरता

बस्ती की मंडियों में आज अच्छी गुणवत्ता का आम ₹150 से ₹200 प्रति किलो बिक रहा है। एक गिलास असली मैंगो शेक बनाने में कम से कम 200 ग्राम आम का गूदा, दूध और चीनी लगती है, जिसकी लागत ही ₹40-50 के पार जाती है। ऐसे में सवाल यह है कि शहर के चौराहों पर ₹15 और ₹20 में बिकने वाला यह ‘पीला शरबत’ आखिर बन किस चीज़ से रहा है?

कैसे तैयार हो रहा है ‘नकली’ मैंगो शेक?

  • हमारी पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मिलावटखोरों का यह खेल तीन चरणों में चलता है:
  • दिखावे के आम: काउंटर पर ताजे आम केवल ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए सजाए जाते हैं।
  • कैमिकल का खेल: शेक को गाढ़ा करने के लिए घटिया दर्जे के पाउडर और ‘लिक्विड एसेंस’ का उपयोग होता है।
  • सिंथेटिक कलर: इसे गहरा पीला और आकर्षक बनाने के लिए उन रंगों का प्रयोग किया जा रहा है, जो खाद्य मानकों (FSSAI) के अनुसार प्रतिबंधित हैं।

सेहत पर सीधा प्रहार: ‘स्लो पॉइजन’ है यह शेक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह मिलावटी शेक केवल पेट खराब नहीं करता, बल्कि शरीर के मुख्य अंगों को धीरे-धीरे खत्म कर देता है:

  • लिवर और किडनी: कैमिकल को फिल्टर करने के चक्कर में लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ता है।
  • कैंसर का खतरा: सिंथेटिक रंगों और प्रिजर्वेटिव्स के लंबे समय तक सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां पनप सकती हैं।
  • बच्चों के लिए घातक: मासूमों की इम्युनिटी कमजोर होती है, जिससे वे स्किन एलर्जी और पाचन तंत्र की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल?

बस्ती मंडल के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) विभाग की सुस्ती इन मिलावटखोरों के हौसले बुलंद कर रही है। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या महामारी का इंतज़ार कर रहा है?

हमारी अपील: प्रशासन तत्काल प्रभावी छापेमारी करे और इन ‘मौत के सौदागरों’ के लाइसेंस रद्द कर कड़ी कानूनी कार्यवाही करे।

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल

जागरूक बनें, स्वस्थ रहें। याद रखें, चंद रुपयों की बचत आपकी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है!

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