उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊ

बस्तीवासियों के लिए तोहफा: अब हर कदम पर होगा ‘टोल-टोल’ का स्वागत

बस्ती का विकास: अब जेब कटने का सफर हुआ और भी आसान! सड़कें न सही, टोल तो हैं: बस्ती के विकास की नई गाथा

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती का नया ‘विकास’ मॉडल: सड़कें कम, टोल ज़्यादा!

  • बस्ती का नया ‘विकास’ मॉडल: सड़कें कम, टोल प्लाजा ज्यादा!टोल प्लाजाओं का शहर: बस्ती की अब यही है ‘नई पहचान’
  • बस्ती की नई पहचान: ‘एक जिला, चार टोल’ का अनोखा रिकॉर्ड
  • विकास की दौड़ में बस्ती: मंजिल मिले न मिले, टोल जरूर मिलेगा!
  • बस्ती के नाम एक और ‘उपलब्धि’: अब टोल की संख्या से मापा जाएगा विकास

​बस्ती के निवासियों के लिए अब गर्व का एक नया बहाना तैयार है। अगर कोई आपसे पूछे कि आपके जिले में नया क्या हुआ है, तो बिना झिझके कहिएगा—”विकास? अरे भाई, हमारे यहाँ तो टोल प्लाजाओं की फसल लहलहा रही है!”

​किसी ज़माने में विकास को सड़कों, पुलों और कारखानों की संख्या से मापा जाता था। लेकिन अब जमाना बदल गया है। बस्ती ने विकास की नई परिभाषा गढ़ी है। अब तरक्की का पैमाना किलोमीटर की लंबी सड़कें नहीं, बल्कि उन पर लगने वाले टोल गेटों की घनी आबादी है। ‘एक जिला, चार टोल’ का नारा अब बस्ती की नई पहचान है।

​सुविधाओं के नाम पर शायद हम आज भी वहीं खड़े हैं जहाँ दशकों पहले थे—रोजगार के लिए पलायन आज भी मजबूरी है और औद्योगिक इकाइयों का अता-पता नहीं है। लेकिन, सरकार ने हमारी यात्रा को ‘यादगार’ बनाने की पूरी कोशिश की है। अब आप शहर से निकलें, तो हर कुछ किलोमीटर पर जेब ढीली करने के लिए एक आधुनिक टोल गेट आपका स्वागत करता है।

​ऐसा लगता है कि प्रशासन का ‘बस्ती विकास मंत्र’ अब यही हो गया है: सड़कें बनाओ न बनाओ, टोल हर हाल में लगाओ!

​सोचिए, किसी बाहरी मेहमान को जब हम अपनी गलियों में ले जाएंगे, तो उसे यह बताने में कितनी शर्म आएगी कि हमारे पास अच्छे अस्पताल नहीं हैं, लेकिन हमारे पास टोल की ऐसी ‘माला’ है कि कोई भी शहर ईर्ष्या कर ले। क्या टोल प्लाजा अब हमारी नई ‘पर्यटन स्थली’ बन गए हैं? जहाँ गाड़ियां रुकती हैं, फास्टैग स्कैन होता है और हम अपनी जेब का ‘बलिदान’ देकर आगे बढ़ जाते हैं।

​बस्ती वालों, अब तो खुश हो जाइए! विकास अब आपके घर के द्वार तक नहीं, बल्कि आपकी गाड़ी के टायर के नीचे तक आ गया है। बस, अगली बार जब टोल पर लाइन में लगें, तो इसे ‘रुकना’ मत समझिएगा, इसे ‘बस्ती के विकास में योगदान’ समझिएगा।

​आखिरकार, सड़कें तो बस आने-जाने का जरिया हैं, असली ‘रौशनी’ तो टोल की लाइटों में ही है! 😄

Back to top button
error: Content is protected !!