उत्तर प्रदेशबस्ती

खलीलाबाद कोतवाली का बड़ा कारनामा: मालखाने से 427 ग्राम सोना और नकदी गायब

पुलिस मालखाने की सुरक्षा पर सवाल: रिकॉर्ड में दर्ज माल, पर अलमारी खाली ​संत कबीर नगर: मालखाने से कीमती सामान गायब होने पर हेड मुहर्रिर पर मुकदमा ​सुरक्षित नहीं पुलिस का मालखाना: अदालती साक्ष्य गायब होने से हड़कंप ​कोतवाली में 'भ्रष्टाचार' का खेल: बिना मिलान चार्ज लेने वाले पुलिसकर्मियों की लापरवाही आई सामने

अजीत मिश्रा (खोजी)

कहीं मंदिर तो कहीं थाना, जो जहां है वहीं बेगाना: रखवाले ही निकले लुटेरे

  • खलीलाबाद कोतवाली का सनसनीखेज मामला: मालखाने से गायब हुआ कीमती सामान

संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद कोतवाली से एक बेहद गंभीर और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। वहां के मालखाने से साक्ष्यों के तौर पर जमा किया गया लाखों रुपये का कीमती सामान गायब हो गया है।”कहीं मंदिर तो कहीं थाना, जो जहां है वहीं बेगाना।” यह कहावत आज उस व्यवस्था पर सटीक बैठती है, जिसे आम आदमी अपनी सुरक्षा और न्याय का आखिरी ठिकाना मानता है। लेकिन जब रखवाले ही ‘लुटेरे’ बन जाएं, तो फिर आम नागरिक अपनी फरियाद लेकर कहां जाए?

संत कबीर नगर के खलीलाबाद कोतवाली की खबर रोंगटे खड़े करने वाली है। जिस मालखाने को जनता की गाढ़ी कमाई और साक्ष्यों का सुरक्षित भंडार होना चाहिए था, वह खुद ही एक घोटाले का अड्डा बन गया। वहां से 427 ग्राम सोना, 49,518 रुपये और 14 नेपाली नोट गायब हो गए।

घटना का विवरण और खुलासा

  • गायब हुआ सामान: पुलिस मालखाने से 427 ग्राम सोना, 49,518 रुपये की नकदी और 14 नेपाली नोट गायब पाए गए हैं।
  • सामने कैसे आया मामला: मोतीनगर निवासी अलीम खान ने वर्ष 2018 में दर्ज एक मामले से जुड़े सामान की सुपुर्दगी के लिए अप्रैल 2026 में न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। जब अदालत ने इस पर रिपोर्ट मांगी और मालखाने के दस्तावेजों (रजिस्टर और चार्ज सूची) का मिलान किया गया, तो हकीकत सामने आई कि रिकॉर्ड में माल दर्ज है, लेकिन मालखाना खाली है।

जांच और लापरवाही का सिलसिला

  • प्रशासनिक चूक: जांच में पाया गया कि जिस हेड मुहर्रिर ने यह माल जमा कराया था, उसका तबादला हो चुका है। बाद में कार्यभार संभालने वाले पुलिसकर्मियों ने चार्ज लेते समय सामान का मिलान नहीं किया था, जिसके कारण यह गंभीर चूक हुई।
  • आरोपी पर कार्रवाई: तत्कालीन हेड मुहर्रिर राधेश्याम गुप्ता को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनके नहीं आने पर संदेह और गहरा गया। विभागीय जांच में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद, वर्तमान हेड मुहर्रिर गोविंद शरण की तहरीर पर राधेश्याम गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
  • पुलिस का पक्ष: कोतवाली प्रभारी जय प्रकाश दुबे ने बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों, रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

हैरानी की बात तो यह है कि यह ‘खेल’ तब खुला जब एक फरियादी अलीम खान ने 2018 के एक मामले में माल की सुपुर्दगी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। कागजों पर सब कुछ दर्ज था—रिकॉर्ड बोल रहा था कि माल जमा है, लेकिन हकीकत में मालखाना खाली था!

यह केवल एक हेड मुहर्रिर या एक घटना का सवाल नहीं है। यह उस व्यवस्था पर गंभीर सवाल है जहां रिकॉर्ड और हकीकत के बीच इतना बड़ा फासला है। जब तत्कालीन हेड मुहर्रिर का तबादला हुआ, तो कार्यभार संभालने वालों ने बिना ठीक से मिलान किए चार्ज ले लिया और असली मुजरिम तब तक अपनी राह बदल चुका था।

क्या यही है सुशासन? जहाँ सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाली पुलिस के अपने ही दफ्तर में साक्ष्य सुरक्षित नहीं हैं, वहां आम आदमी का भरोसा कैसे कायम रहेगा? यह घटना आईना दिखाती है कि कैसे जिम्मेदारों की लापरवाही और मिलीभगत से कानून का मजाक बनता है। अब मुकदमा दर्ज हो गया है, जांच चल रही है—लेकिन सवाल यह है कि जनता का उस ‘खोए हुए विश्वास’ का क्या होगा, जो इन फाइलों और मालखानों के बीच कहीं दफन हो गया है?

यह घटना पुलिस विभाग के रिकॉर्ड प्रबंधन और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े करती है, जहाँ अदालती साक्ष्य ही गायब हो गए।

।। सूत्र।।

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