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सफेदपोशों की काली कमाई: बस्ती में ‘खाकी’ खामोश, ‘खादी’ तस्करों के साथ!

नशे के सौदागरों का 'माननीय' कवच: आखिर कब तक बिकेगा युवाओं का भविष्य?

अजीत मिश्रा (खोजी)

🚨सत्ता की सरपरस्ती में ‘जहर’ का कारोबार: बस्ती में खादी और नशे के सौदागरों का गठजोड़🚨

⭐बबुरहवा पुल के नीचे ‘जहर’ की दुकान: पुलिस की नाक के नीचे स्मैक और गांजे का तांडव।

⭐लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार: सच लिखने वाले पत्रकारों पर मुकदमों की बौछार क्यों?

⭐बस्ती का ‘नशा नेक्सस’: एक फोन कॉल और थम जाती है पुलिस की कार्रवाई!

बस्ती मंडल ब्यूरो, उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। किसी भी सभ्य समाज के लिए इससे डरावनी तस्वीर और क्या होगी कि जिन कंधों पर भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वही रक्षक अब भक्षकों के ‘एजेंट’ बनकर उभर रहे हैं। बस्ती जिले के हर्रैया और छावनी क्षेत्र से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, बल्कि उन सफेदपोश नेताओं के चरित्र को भी बेनकाब करती हैं जो चंद रुपयों की खातिर अगली पीढ़ी की रगों में स्मैक और गांजे का जहर घोल रहे हैं।

💫आखिर क्यों ‘माननीयों’ के चहेते हैं नशे के सौदागर?

आज जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर क्या मजबूरी है कि नेताओं को इन तस्करों की ढाल बनना पड़ रहा है? क्या नेताओं का चुनावी ‘खर्चा-पानी’ अब इन अवैध धंधों की काली कमाई के बिना नहीं चल सकता?

यह एक खुला रहस्य है कि नशे के कारोबारियों को पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए एक मजबूत राजनीतिक छत्रछाया की जरूरत होती है। बदले में ये तस्कर नेताओं को वह ‘आर्थिक रसद’ पहुंचाते हैं, जो चुनावों में पानी की तरह बहाई जाती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सत्ता की ये कुर्सियां इतनी कीमती हो गई हैं कि उनके लिए स्कूली बच्चों और युवाओं का जीवन दांव पर लगा दिया जाए?

💫हर्रैया और छावनी: ‘अघोषित’ सुरक्षित गलियारे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अयोध्या के पास स्थित महाकाल टी सेंटर और बबुरहवा पुल के नीचे का इलाका नशे के कारोबार का गढ़ बन चुका है।

🔥खुलेआम बिक्री: स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ 24 घंटे गांजा और स्मैक उपलब्ध है।

🔥पुलिस की चुप्पी: क्या यह संभव है कि जिस इलाके में पुलिस की गश्त होती हो, वहां ‘पुड़िया’ का साम्राज्य स्थापित हो जाए और खाकी को खबर न हो? जनता इसे सीधे तौर पर पुलिस और तस्करों की ‘मिलीभगत’ मान रही है।

🔥नेताओं का दबाव: जैसे ही पुलिस किसी छोटे प्यादे पर हाथ डालती है, ‘ऊपर’ से फोन की घंटियां बजने लगती हैं। रसूखदार लोग अपने ‘आकाओं’ को सक्रिय कर देते हैं और अंततः कार्रवाई फाइलों में दबकर रह जाती है।

💫लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार

इस पूरे प्रकरण का सबसे काला अध्याय वह है, जहाँ सच दिखाने वाले पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। जब मीडिया इन नेक्सस (Nexus) का खुलासा करती है, तो नेता और उनके गुर्गे बौखला जाते हैं।

😇”पत्रकार पर दर्ज मुकदमे उसकी ईमानदारी का सर्टिफिकेट हैं।”

अखबारों की प्रतियां जलाना, फर्जी मुकदमे दर्ज कराना या संस्थानों पर दबाव डालकर पत्रकारों को नौकरी से निकलवाना—ये हथकंडे इस बात का प्रमाण हैं कि सच से सत्ता कितनी डरी हुई है। जो नेता पत्रकारों को डराकर चुप कराना चाहते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि वे समाज के हीरो नहीं, बल्कि अपराधी के मानसिक सहयोगी हैं।

💫समय आ गया है ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का

अगर बस्ती के प्रशासन और स्थानीय नेताओं को अपनी छवि की जरा भी फिक्र है, तो उन्हें हुड़वा कुंवर के बाबू साहब जैसे सफेदपोशों और उनके पालतू तस्करों के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़नी होगी।

👉जनता की मांग: पुलिस केवल ‘खर्चा-पानी’ लेकर चुप न बैठे, बल्कि सरगनाओं को सलाखों के पीछे भेजे।

👉नेताओं को चेतावनी: युवा शक्ति को नशे की गर्त में धकेलने वाले नेता याद रखें, कि जिस दिन घर-घर से आक्रोश निकलेगा, उस दिन न कुर्सी बचेगी और न ही ये रसूख।

📢 नशे का यह कारोबार सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के खिलाफ एक ‘युद्ध’ है। और जो नेता इस युद्ध में तस्करों के साथ खड़े हैं, इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।📢IMG 20260322 WA0005

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