
मान्यता 5वीं की, दुकान 8वीं तक: कुसौरा बाज़ार के ‘आर्मी एकेडमी’ में शिक्षा के नाम पर बड़ा खेल!
मासूमों के भविष्य से 'सर्जिकल स्ट्राइक': बिना मान्यता चल रही कक्षाएं, टीसी के लिए दर-दर भटक रहे अभिभावक।
अजीत मिश्रा (खोजी)
शिक्षा के नाम पर ‘फर्जीवाड़े की फौज’: मान्यता कक्षा 5 की, दुकान सजी 8वीं तक!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
- शिक्षा विभाग की नाक के नीचे फर्जीवाड़ा: दूसरे स्कूलों के नाम पर बंट रही मार्कशीट, आखिर कब तक चलेगा ये काला खेल?
- उधार की मार्कशीट, फर्जी पढ़ाई: आर्मी एकेडमी का कारनामा उजागर।
- प्रधानाध्यापक का कबूलनामा: ‘जुगाड़’ के भरोसे चल रहा कक्षा 8 तक का सफर।
- बीएसए की रडार पर कुसौरा बाज़ार: नोटिस जारी, गिरेगी कार्रवाई की गाज!
- वाह रे शिक्षा! स्कूल अपना, मान्यता ‘पड़ोसी’ की; कुसौरा बाज़ार में शिक्षा व्यवस्था तार-तार।
कुसौरा बाज़ार (बस्ती)।। बस्ती जनपद के कुसौरा बाज़ार में ‘आर्मी एकेडमी’ के नाम पर शिक्षा का ऐसा ‘चक्रव्यूह’ रचा गया है, जहाँ छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की सारी हदें पार कर दी गई हैं। खुद को शिक्षा का मंदिर कहने वाला यह संस्थान असल में कागजों पर बौना और दावों में फर्जी साबित हो रहा है। सनसनीखेज खुलासा यह है कि विद्यालय के पास मान्यता तो केवल कक्षा 5 तक की है, लेकिन यहाँ बेखौफ होकर कक्षा 8 तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
प्रधानाध्यापक का कबूलनामा: ‘जुगाड़’ से बनती हैं मार्कशीटें
मामले की परतों को खुद प्रधानाध्यापक अखिलेश चौधरी के बयानों ने उधेड़ कर रख दिया है। पूछताछ में उन्होंने सीना ठोककर स्वीकार किया कि मान्यता सिर्फ 5वीं तक है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को मार्कशीट और टीसी (TC) दूसरे स्कूलों के ‘पिछवाड़े’ से बनवाई जाती है। जब उस ‘रहमदिल’ स्कूल का नाम पूछा गया जो इस अवैध कारोबार में साझीदार है, तो प्रधानाध्यापक की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। सवाल यह है कि आखिर वह कौन सा संस्थान है जो इस काले खेल में आर्मी एकेडमी का कवच बना हुआ है?
अभिभावकों का उत्पीड़न: न टीसी मिल रही, न मार्कशीट
शिक्षा के इस गोरखधंधे की मार अब मासूमों पर पड़ रही है। एक पीड़ित अभिभावक ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को दिए लिखित शिकायती पत्र में विद्यालय प्रशासन की दबंगई का कच्चा चिट्ठा खोला है। आरोप है कि उनकी बेटी ने कक्षा 6 उत्तीर्ण कर ली है, लेकिन एक हफ्ते से वह टीसी और मार्कशीट के लिए स्कूल की चौखट रगड़ रही है। विद्यालय प्रशासन दस्तावेज देने के बजाय अभिभावक को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है।
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध ‘कोचिंग सह स्कूल’ को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है? बिना मान्यता के ऊँची कक्षाएं चलाना छात्रों के भविष्य को अंधेरे में धकेलना नहीं तो और क्या है?
BSA सख्त: अब कार्रवाई की बारी
मामले के तूल पकड़ते ही विभाग की नींद टूटी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जाँच के आदेश दिए हैं और विद्यालय को नोटिस थमाने की तैयारी कर ली है। BSA ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ऐसे स्कूलों को बख्शा नहीं जाएगा।
कुसौरा बाज़ार का यह मामला केवल एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम फर्जी केंद्रों के लिए चेतावनी है जो शिक्षा को व्यापार बना चुके हैं। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन केवल नोटिस देकर खानापूर्ति करता है या इस ‘अवैध दुकान’ पर ताला जड़कर मिसाल कायम करता है।













