उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊ

बस्ती में कानून-व्यवस्था पर सवाल: वाल्टरगंज पुलिस के रवैये से बढ़े अपराधियों के हौसले

वाल्टरगंज पुलिस का 'सुविधा शुल्क' प्रेम: 6 दिन बाद FIR दर्ज, पीड़ित दर-दर भटकने को मजबूर: रक्षक ही बने भक्षक? वाल्टरगंज पुलिस पर FIR में देरी और 'लीपा-पोती' का गंभीर आरोप

अजीत मिश्रा (खोजी)

वाल्टरगंज पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: 6 दिन बाद FIR दर्ज करने का आरोप, क्षेत्र में बढ़ते अपराधों से जनता में आक्रोश

ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल

  • वाल्टरगंज: अपराधों की बढ़ती तादाद और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
  • बस्ती: 6 दिन बाद FIR दर्ज होने से क्षेत्र में आक्रोश, कार्यशैली को लेकर पुलिस घेरे में
  • वाल्टरगंज थाने में एक महीने में 30 FIR, पुलिस की शिथिलता से जनता परेशान
  • नारी सुरक्षा के दावों की उड़ रही धज्जियां: वाल्टरगंज पुलिस की ढिलाई से पीड़ित महिलाओं का बुरा हाल
  • वाल्टरगंज: महिला उत्पीड़न के मामलों में भी पुलिस की देरी, ‘मिशन शक्ति’ पर बड़ा सवाल

बस्ती: जनपद के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति बदहाल होती जा रही है। बढ़ते अपराधों और पुलिस की कथित शिथिलता के चलते स्थानीय जनता में भारी रोष व्याप्त है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस न केवल मामलों में देरी कर रही है, बल्कि ‘सुविधा शुल्क’ के खेल में न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने में जुटी है।

​6 दिन बाद FIR, सवालों के घेरे में पुलिस

​ताजा मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, वाल्टरगंज थाना क्षेत्र में एक घटना 22 मई 2026 को घटित हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने शिकायत के बावजूद प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में करीब 6 दिनों की लंबी देरी की और मामला 28 मई 2026 को दर्ज किया गया। इस देरी ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

​अपराधों का गढ़ बनता वाल्टरगंज

​क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि वाल्टरगंज थाना क्षेत्र में लूट, हत्या और मारपीट जैसी संगीन वारदातें अब आम बात हो गई हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो महज एक महीने के भीतर लगभग 30 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जो इलाके में बढ़ते अपराधों की भयावह तस्वीर पेश करती हैं। लोगों का आरोप है कि थानाध्यक्ष इन मामलों में सख्त कार्रवाई करने के बजाय लीपा-पोती करने में व्यस्त हैं।

​’नारी सुरक्षा’ के दावों की उड़ रही धज्जियां

​क्षेत्रीय निवासियों का तर्क है कि जहां एक ओर सरकार ‘नारी सशक्तिकरण’ और ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियानों के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा का दम भरती है, वहीं वाल्टरगंज पुलिस का रवैया इसके बिल्कुल विपरीत है। समय पर कार्रवाई न होने और पीड़ितों को न्याय के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर करने से महिलाओं का मनोबल गिर रहा है और अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

​पुलिस अधीक्षक की छवि पर आंच

​स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि थाना प्रभारी की संदिग्ध कार्यप्रणाली से न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) की छवि भी धूमिल हो रही है। यदि जिम्मेदार अधिकारी ही इस तरह की ढिलाई बरतेंगे, तो आम आदमी को न्याय कैसे मिलेगा?

​अब देखना यह होगा कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हुए वाल्टरगंज पुलिस की कार्यप्रणाली की जांच कराएंगे, या फिर क्षेत्र की जनता इसी तरह रक्षकों के ‘भक्षक’ बनने का दंश झेलती रहेगी।

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