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मरवटिया तिवारी में विकास को लगा ‘भ्रष्टाचार’ का ग्रहण: 5 साल बीते, पर अधूरा है पंचायत भवन का शौचालय

साहब! कागजों पर तो शौचालय बन गया, जमीन पर ढक्कन और दरवाजे तलाश रही जनता

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा मरवटिया तिवारी का पंचायत भवन; 5 साल बीते, पर नहीं बना शौचालय

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • प्रधान-सचिव की जुगलबंदी में ‘गुल’ हुआ सरकारी धन, अफसरों के दौरे के बाद भी बदहाल है पंचायत सचिवालय
  •  मरवटिया तिवारी में प्रधान की ‘लापरवाही’ बेनकाब, बदबू और गंदगी के बीच बैठने को मजबूर सचिव
  • कप्तानगंज: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा मरवटिया तिवारी का ‘स्वच्छ भारत मिशन’

कप्तानगंज (बस्ती): सरकारें बदल गईं, योजनाएं आईं, लेकिन विकासखंड कप्तानगंज के ग्राम पंचायत मरवटिया तिवारी में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि पांच साल का कार्यकाल बीतने को है और पंचायत भवन का शौचालय आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

कागजों पर ‘स्वच्छ भारत’, जमीन पर खुला गड्ढा और टूटा दरवाजा

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने ग्राम प्रधान और सचिव के विकास के दावों की पोल खोलकर रख दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि:

  • ​शौचालय के गड्ढे का ढक्कन बंद करने के बजाय दीवार से सटाकर रखा गया है, जो किसी भी समय बड़े हादसे को दावत दे सकता है।
  • शौचालय की सीट गंदगी से बजबजा रही है।
  • दरवाजे टूटे और खुले पड़े हैं, जो सरकारी धन के खुले दुरुपयोग का जीवंत प्रमाण हैं।

साहब आते हैं, देखते हैं और मौन हो जाते हैं!

​हैरानी की बात यह है कि इसी पंचायत भवन में जिले के आला अधिकारियों का जमावड़ा लगता है। रोस्टर के अनुसार सचिव रजनी दुबे को यहाँ बैठकर जनता की समस्याएँ सुननी होती हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन अधिकारियों की आँखों पर पट्टी बंधी है? या फिर ग्राम प्रधान अजय कुमार और सचिव की मिलीभगत को उच्चाधिकारियों का मूक संरक्षण प्राप्त है?

“अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता” – यह कहावत मरवटिया तिवारी के प्रधान और सचिव पर सटीक बैठती है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान ने शपथ लेने के पहले दिन से ही भ्रष्टाचार की जो गति पकड़ी थी, वह पांच साल बीतने के बाद अब ‘रॉकेट’ की रफ्तार ले चुकी है।

 

जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति?

​जिले में इस अधूरे निर्माण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक विकास का पैसा प्रधान और सचिव की जेबों की शोभा बढ़ाता रहेगा? यदि शासन-प्रशासन ने इस भ्रष्टाचार के खेल पर नकेल नहीं कसी, तो इस ग्राम पंचायत का समग्र विकास केवल फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस ‘वायरल सच’ पर संज्ञान लेकर दोषियों पर चाबुक चलाता है या भ्रष्टाचार की यह गंगा यूँ ही अविरल बहती रहेगी।

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