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प्रशासनिक नींद और ‘सील’ की राजनीति: क्या हादसों का इंतज़ार करती है व्यवस्था?

23 Jun 2026, 10:54 AM • Vande Bharat Live TV News
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अजीत मिश्रा (खोजी)

लखनऊ अग्निकांड का ‘ट्रिगर’: कानपुर में कोचिंग संस्थानों पर चला केडीए का बुलडोजर, 16 सील; प्रशासन सख्त

  • कानपुर: लखनऊ अग्निकांड के बाद सख्त हुआ प्रशासन, सुरक्षा मानकों में लापरवाही पर 16 कोचिंग सेंटर सील
  • KDA का बड़ा एक्शन: कानपुर में फिजिक्सवाला और महेंद्र कोचिंग समेत 16 व्यावसायिक प्रतिष्ठान सील
  • सुरक्षा से खिलवाड़ पड़ा भारी: कानपुर में 16 कोचिंग संस्थानों पर लगी सील, 22 और पर लटकी तलवार

कानपुर। लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए हृदयविदारक अग्निकांड के बाद समूचे उत्तर प्रदेश में प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को लेकर कमर कस ली है। इसी कड़ी में कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने शहर में चल रहे कोचिंग माफिया और नियमों को ताक पर रखने वाले व्यावसायिक संस्थानों के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ शुरू कर दी है। सोमवार को लखनऊ में मची तबाही का असर मंगलवार 23 जून को कानपुर की सड़कों पर दिखा, जब केडीए की टीम ने बड़े कोचिंग ब्रांडों सहित 16 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई की।लखनऊ के अलीगंज में हुए भयावह अग्निकांड, जिसमें 15 लोगों ने अपनी जान गंवाई, ने उत्तर प्रदेश के कोचिंग माफिया और नियमों को ताक पर रखकर चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के चेहरे से नकाब उतार दिया है। शासन और प्रशासन की नींद तब खुली है जब राख के ढेर से शव निकले हैं। कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) द्वारा आनन-फानन में की गई 16 संस्थानों की सीलिंग, जिसमें ‘फिजिक्सवाला’ जैसे दिग्गज नाम भी शामिल हैं, सुरक्षा के नाम पर हो रहे बड़े खिलवाड़ की कलई खोलती है।

​22 जून का वह दिन: जब प्रशासन ने तोड़ी चुप्पी

​कानपुर में लंबे समय से अवैध तरीके से चल रहे कोचिंग संस्थानों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को लेकर शिकायतें आ रही थीं। लेकिन सोमवार को लखनऊ में तीन मंजिला इमारत में लगी आग से 15 लोगों की दर्दनाक मौत और 9 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने पूरे तंत्र को हिला दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद, केडीए ने तत्काल प्रभाव से अभियान छेड़ा। 22 जून को चलाए गए इस व्यापक अभियान में विभिन्न जोनों के 16 संस्थानों को चिन्हित कर सील कर दिया गया।सवाल यह है कि ये कोचिंग संस्थान और व्यावसायिक इमारतें कल तक वैध कैसे थीं? क्या कल तक इन इमारतों के नक्शे पास थे, क्या कल तक फायर सेफ्टी के मानक पूरे थे? आज सीलिंग की कार्रवाई यह साबित करती है कि कानपुर में प्रशासनिक तंत्र या तो सो रहा था या फिर किसी ‘मौन सहमति’ के तहत इन संस्थानों की अनदेखी कर रहा था।

हजारों छात्रों के भविष्य और सुरक्षा को दांव पर लगाकर चलने वाले ये कोचिंग सेंटर सिर्फ शिक्षा की दुकानें नहीं, बल्कि ‘अग्नि-कुंड’ बन चुके थे। जब लखनऊ में चिताएं जलीं, तब जाकर कानपुर के अधिकारियों को याद आया कि उन्हें ‘मानकों’ की जांच भी करनी है।

​कार्रवाई का लेखा-जोखा: जोनवार विवरण

​केडीए की टीमों ने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर शहर के विभिन्न हिस्सों में धावा बोला। सीलिंग की स्थिति इस प्रकार रही:

  • जोन-1ए: 3 संस्थान
  • जोन-2बी: 5 संस्थान
  • जोन-3: 3 संस्थान
  • जोन-4: 5 संस्थान कुल 16 संस्थानों को सील कर प्रवेश द्वारों पर नोटिस चस्पा किए गए और प्रतिबंधात्मक टेप लगाकर परिसर को सुरक्षित (सील) किया गया।

​किन बड़े नामों पर गिरी गाज?

​इस कार्रवाई में कई प्रमुख कोचिंग संस्थान जद में आए, जो शहर में छात्रों के बीच बहुत लोकप्रिय थे:

  • Physics Wallah (PW) Vidyapeeth
  • Vidyapeeth IIT-JEE/NEET Foundation
  • Sanjeev Rathore Chemistry for JEE/NEET (UG) Foundation
  • Mahendra’s Coaching Institute इनके अलावा, कई छोटे-बड़े प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले केंद्रों पर भी ताले जड़े गए।

​सुरक्षा में चूक: क्या था असली कारण?

​प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि इन संस्थानों में सुरक्षा के बुनियादी मानकों का अभाव था। निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित कमियां मुख्य रूप से पाई गईं:

  1. फायर एनओसी का अभाव: अधिकांश संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग का वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं था।
  2. आपातकालीन निकास (Emergency Exit): संकरी सीढ़ियां और इमरजेंसी निकास द्वार का न होना सबसे बड़ी लापरवाही थी।
  3. भवन मानचित्र का उल्लंघन: आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन और नक्शे के विपरीत अवैध निर्माण।
  4. दस्तावेजों में हेरफेर: भूमि उपयोग के नियमों की अनदेखी।

​आगे क्या? 22 और संस्थानों पर तलवार लटकी

​केडीए ने साफ कर दिया है कि यह केवल शुरुआत है। प्राधिकरण ने 22 अन्य प्रतिष्ठानों की सूची तैयार कर ली है। इन संस्थानों के भवन मानचित्र, फायर सेफ्टी व्यवस्था और आपातकालीन निकासी रास्तों की गहन जांच की जाएगी। मानकों के अनुरुप न होने पर इन्हें भी सील कर दिया जाएगा।

​लखनऊ मामले में सख्त कार्रवाई

​लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड ने राज्य सरकार को हिला दिया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए:

  • ​इमारत के मालिकों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
  • ​मुख्यमंत्री के आदेश पर चार जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
  • ​मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जो इस बात की पड़ताल करेगी कि इतने समय से ये इमारतें बिना सुरक्षा मानकों के कैसे संचालित हो रही थीं।

​जिम्मेदारी किसकी?

लखनऊ अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निलंबित कर अपनी सख्ती दिखाई है, लेकिन जमीनी स्तर पर जवाबदेही का अभाव अब भी स्पष्ट है। कोचिंग संस्थानों की संचालक मंडलियां भारी-भरकम फीस वसूलती हैं, लेकिन छात्रों की सुरक्षा पर एक रुपया खर्च करना भी उन्हें मुनाफे में घाटा लगता है।

प्रशासनिक मिलीभगत का आलम यह है कि बिना किसी ठोस फायर ऑडिट के, ये संस्थान सालों से फल-फूल रहे थे। अब सीलिंग के बाद इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य अधर में है, जिसका जिम्मेदार कौन है? छात्र? या वे अधिकारी जिनकी नाक के नीचे ये नियम विरुद्ध इमारतें खड़ी हो गईं?

प्रशासन का सख्त रुख

​केडीए के अधिकारियों का कहना है, “छात्रों की सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोचिंग संस्थानों को यह समझना होगा कि वे शिक्षा का व्यापार तो कर सकते हैं, लेकिन छात्रों की जान का नहीं।”

​यह अभियान केवल कोचिंग केंद्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मॉल, हॉस्पिटल और उन सभी सार्वजनिक परिसरों की जांच की जाएगी जहां भीड़ अधिक रहती है। लखनऊ का सबक यह है कि ‘सुरक्षा’ केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखनी चाहिए। अब देखना यह है कि क्या यह सीलिंग स्थाई समाधान बनेगी या फिर कुछ समय बाद सब कुछ ‘पहले जैसा’ हो जाएगा।सीलिंग की यह कार्रवाई तब तक एक ढकोसला ही मानी जाएगी जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होता। केवल टेप लगाकर दरवाजे बंद कर देने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। यह समय ‘सीलिंग के खेल’ से आगे बढ़कर उन भ्रष्ट अधिकारियों की जांच करने का है, जिनकी लापरवाही ने शहर को एक और बड़े हादसे की दहलीज पर ला खड़ा किया है।

अगर प्रशासन वास्तव में सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो उसे केवल कोचिंग सेंटरों पर ही नहीं, बल्कि शहर की हर उस बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत पर डंडा चलाना होगा जो ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बनी हुई है। लखनऊ का सबक कानपुर और पूरे उत्तर प्रदेश को यह याद दिलाता है कि आग लगने के बाद कुआं खोदने की परंपरा अब बंद होनी चाहिए।

छात्रों की जिंदगी कोई प्रयोग नहीं है, और प्रशासन का काम सिर्फ फाइलें पलटना नहीं, बल्कि जान बचाना भी है।

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