
संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा गढ़वा ✅ पलामू प्रमंडल की आयुक्त श्रीमती कुमूद सहाय के एक औचक निरीक्षण से शनिवार को बंशीधर नगर और रमना में प्रशासनिक अमले के बीच हड़कंप मच गया।
आयुक्त ने बंशीधर नगर स्थित अनुमंडलीय अस्पताल और रमना प्रखंड कार्यालय का औचक निरीक्षण कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस दौरान बड़े पैमाने पर लापरवाही, गंदगी और अधिकारियों-कर्मचारियों की अनुपस्थिति पाए जाने पर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई करते हुए गायब मिले सभी कर्मियों का निरीक्षण के दिन का वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित (Hold) करने का निर्देश दिया है।
निरीक्षण के बाद अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए आयुक्त ने कहा:
”बेहतर कार्यप्रणाली, समयपालन और जवाबदेही से ही विकास योजनाओं को गति मिलेगी। जनता की सेवा में किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
अनुमंडलीय अस्पताल में बदहाली: तड़पता रहा बच्चा, डॉक्टर नदारद जब आयुक्त बंशीधर नगर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचीं, तो वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई मिली। अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ थी, लेकिन सेवा देने वाले नदारद थे।
लापरवाही की हद: निरीक्षण के दौरान अस्पताल में केवल एक डॉक्टर उपस्थित मिले, जबकि बाकी स्टाफ गायब था। हद तो तब हो गई जब वहां तेज बुखार से पीड़ित एक मासूम बच्चा मिला, जिसे काफी समय से किसी डॉक्टर ने देखा तक नहीं था। आयुक्त ने इस पर तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
- गंदगी का अंबार: अस्पताल के वार्डों और शौचालयों की स्थिति बेहद दयनीय और नारकीय पाई गई। आयुक्त ने अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने अल्टीमेटम दिया कि दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति और इमरजेंसी सेवाओं में तुरंत सुधार करें, अन्यथा निलंबन की कार्रवाई तय है।
- 2. रमना प्रखंड कार्यालय में अनुशासनहीनता पर बरसीं आयुक्त अस्पताल के बाद प्रमंडलीय आयुक्त का काफिला अचानक रमना प्रखंड कार्यालय पहुंचा। वहां उन्होंने दफ्तर की कार्यशैली, उपस्थिति पंजी (Attendance Register) और रोकड़ बही (Cash Book) सहित तमाम महत्वपूर्ण अभिलेखों को खंगाला।

- कुर्सियां खाली, हाजिरी गायब: जांच के दौरान कई अधिकारियों और प्रतिनियुक्त कर्मचारियों की उपस्थिति अत्यंत निराशाजनक पाई गई, जिस पर आयुक्त ने गंभीर आपत्ति जताई।
- “जनता को चक्कर लगवाया तो खैर नहीं”: आयुक्त श्रीमती सहाय ने तल्ख शब्दों में कहा कि सरकारी कार्यालय जनता की समस्याओं के समाधान के लिए हैं, न कि उन्हें परेशान करने के लिए। अगर कर्मचारी समय पर नहीं आएंगे, तो विकास योजनाएं ठप हो जाएंगी। उन्होंने निर्देश दिया कि दफ्तर आने वाले किसी भी आम नागरिक को अपने काम के लिए अनावश्यक चक्कर नहीं काटना पड़ना चाहिए।
3. बीडीओ को निर्देश: अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे सरकारी योजना का लाभ
आयुक्त ने रमना के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के सबसे निचले और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे। उन्होंने सभी फाइलों को अपडेट रखने, कार्यालय संस्कृति में सुधार करने और पूरी संवेदनशीलता के साथ जनता की सेवा करने की हिदायत दी।








